नवजात शिशु की मालिश कैसे करे। माँ के लिए जरूरी जानकारी
मालिश (massage) एक प्राचीन परंपरा है जो शरीर को मजबूती देने के साथ-साथ भावनात्मक जुड़ाव बगी बढ़ाती है। नवजात शिशु की मालिश उसके विकास (growth) और संवेदी अनुभव (sensory development) के लिए बेहद जरूरी है यह न सिर्फ उसके शरीर को पोषण देती है , बल्कि माता-पिता और बच्चे के बिच के रिश्ते को भी मजबूत करती है। आज आप जानेगे के नवजात शिशु की मालिश कैसे करे।
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नवजात शिशु की मालिश कैसे करें (step by step guide)
सर से पैर तक की मालिश :
1. सर और माथा : उँगलियों के सिरों से हलके-हलके गोलाई में घूमते हुए मालिश करे.
2. चेहरा : बहुत नरम हाथों से गाल , नाक और थोड़ी की हलकी मालिश करें।
3. छाती और पेट : दोनों हथेलियों से ऊपर से निचे की दिशा में धीरे धीरे रगड़े।
4. हाथ और पैर : एक - एक उंगली से लेकर पैर तक लम्बी स्ट्रोक तक मालिश करे।
5. पीठ : शिशु को पेट के बल लिटाकर रीढ़ की हड्डी के किनारे- किनारे तेल लगाकर निचे से ऊपर की और मालिश करें।
6. पंजे और एड़ियों : हलके दबाव के साथ गोल - गोल घुमाकर मालिश करें।
शिशु से लगातार संवाद बनाये रखें - उससे बातें करे या हलकी धुन में गाना गायें। यह उसे सुकून देगा।
फायदे:
मांसपेशियां और हडियों की मजबूती
रक्त संचार में सुधर
अच्छी नींद
गैस और पेट में राहत
त्वचा की चमक में बढ़ोतरी
नवजात शिशु की मालिश कब शुरू करें ? सही समय क्या है ?
सामन्य : जन्म के 7 से 10 दिन बाद , जब नाल (umbilical cord) सुखकर गिर जाये और बच्चा थोड़ा स्थिर हो जाये , तब मालिश शुरू की जा सकती है। यदि डिलीवरी या बच्चे में कोई जटिलता रही हो तो डॉक्टर से सलाह लें।
दिन में मालिश करने का सबसे सही समय
सुबह का समय , खासकर स्नान से पहले का वक़्त मालिश के लिए सबसे बेहतर होता है। सुबह - सुबह शिशु अधिक सतर्क और ताज़गी से भरा होता है , जिससे वह मालिश का पूरा लाभ उठा पाता है।
ध्यान दें : कभी भी शिशु के बहुत भूखे या बहुत भरे पेट पर मालिश न करें।
मालिश करने के लिए प्राकृतिक और सुरक्षित तेल
सुरक्षित और प्राकृतिक
नारियल तेल (coconut oil) गर्मियों में ठंडक देने वाला।
सरसों का तेल (mustard oil) सर्दियों में गर्माहट देने वाला।
बादाम तेल (almond oil) त्वचा को पोषण देने वाला।
तिल का तेल (sesame oil) हड्डियों के लिए उपयोगी
घी (clarified butter) बेहद ठंडी जगहों के लिए लाभकारी
बाजार में बेचे जाने वाले परफयूम जैसे तेलों से बचे। हमेशा बिना केमिकल वाला तेल चुने।
शिशु की मालिश करते समय क्या करें और क्या न करें ( dos and don'ts)
क्या करें
हर दिन तेय समय पर मालिश करें
तेल को पहले अपने हाथ पर लगाकर test करें।
शिशु से बात करते रहें।
मालिश को प्यार से करें
क्या न करें
बहुत ठन्डे या गर्म वातावरण में मालिश न करें
तेज़ दबाव से न रगड़ें
कान , नाक या आंख में तेल न लगाएं
एक ही तेल जबरदस्ती इस्तेमाल न करें - मौसम के अनुसार बदलें
मालिश करते वक़्त माता - पिता द्वारा की जाने वाली आम गलतियां
बच्चे के रोने पर भी मालिश जारी रखना
बहुत देर तक मालिश करना (20 मिनट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए )
तेल को बिना test किये इस्तेमाल करना
मालिश के तुरंत बाद नहलाना
मोटे और खुरदुरे कपड़ों से शरीर पोछना
मालिश के बाद क्या करें
हलके गर्म पानी से स्नान कराएं
साफ, सूती तोलिये से शरीर सुखाएं
ढीले और आरामदायक कपडे पहनाएं
यदि बच्चा थक गया हो तो दूध पिलाकर सुला दे
मालिश के बाद का समय माँ और बच्चे के लिए bonding का समय होता है
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मेरी personal स्टोरी। माँ का अनुभव
जब मेरा पहला बच्चा हुआ था , तो मैं बहुत घबराई हुयी थी। मेरी माँ ने मुझे पहली बार मालिश करना सिखाया। वो समय मेरे लिए भावुक था - जैसे ही मैंने अपने बच्चे के छोटे - छोटे हाथ ,पैरों पर तेल लगाया , वह मेरी तरफ देखकर मुस्कुराया। उस पल मुझे एहसास हुआ के यह सिर्फ एक मालिश नहीं , बल्कि हमारे रिश्ते की शुरुआत थी। आज भी हर बार जब मैं मालिश करती हु ,वो पल हमारे बिच एक अनोखी bonding का जरिया बन जाता है।
लेखक के व्यक्तिगत सुझाव : क्यों हर माता - पिता को मालिश को दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। मालिश कोई शरीरिक क्रिया नहीं है , यह एक मालिश भावनात्मक जुड़ाव (emotional bonding ) है। यह शिशु को सुरक्षा , सुकून और माँ बाप की मौजूदगी का एहसास कराती है। यह हर माता पिता मालिश को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं , तो शिशु को शरीरिक विकास के साथ साथ मानसिक और भावनात्मिक मज़बूती भी सुरक्षित हो सकती है।
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conclusion
नवजात शिशु की मालिश एक प्राकृतिक चकित्स्य है , जो पीढ़ियों से चली आ रही है। सही तरिके से , सही समय पर और सही उत्पादों के साथ की गयी मालिश , आपके शिशु को न सिर्फ स्वस्थ बनाएगी बल्कि उसे दुनिया की सबसे प्यारी अनुभवी - आपके स्पर्श का एहसास भी देगी।
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